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महंगाई को काबू में रखने के लिए आरबीआई (RBI) लगातार प्रयास कर रहा है. इसी कारण बीते तीन तिमाही से ब्याज दरों में बढोतरी न करने का ऐलान किया गया था. अप्रैल, जून और अगस्त के दौरान आरबीआई ने ब्याज दरों को स्थिर रखा था ताकि लोगों पर ईएमआई का बोझ न बढ़ सके.

रुस-यूक्रेन वार से जारी है संघर्ष-

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के मुताबिक केंद्रीय बैंक मुद्रास्फति को 4 फीसदी पर रखने को लेकर प्रतिबद्ध है. लेकिन पिछले साल रुस-यूक्रेन के युध्द के दौरान मुद्रास्फिति में तेजी आई जिसके चलते उस दौर में ब्याज दरों में लगातापर बढ़ोतरी करना आरबीआई की मजबूरी बन गई. इसी मजबूरी के चलते रेपो रेट 6.50 फीसदी तक पहुंच गई. पहले रुस-यूक्रेन आरबीआई के सामने विलेन की तरह खड़ा होकर आ गया.

अब महंगाई एक दूसरा खलनायक बनकर आरबीआई के महंगाई कम करने के प्रयासों को चुनौती देता नजर आ रहा है. बीते एक दो महीने से पहले टमाटर ने फिर प्याज ने आम जनता का बजट बिगाड़ कर रख दिया. हालांकि अब इनके दाम पर काबू पाया जा रहा है. लेकिन जिस दौरान इनके दाम जिस तेजी से बढे वो अब आरबीआई (RBI) की चिंता का सबस बन गया है. दरअसल खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी के चलते आरबीआई हो सकता है इस बार ब्याज दरें बढ़ा दे. खुद आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास RBI Governor Shakikant Das) ने इसके संकेत दिए है. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने एक बैठक में इस चिंता का जिक्र किया. शक्तिकांत दास का कहना है कि जिस तेजी से खाद्य कीमतों खासकर टमाटर के दाम तेजी से बढ़े हैं. वो वाकई चिंता का विषय है.आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास कहा कहना है कि खाद्य कीमतों में तेजी के चलते मुद्रास्फिति को संभालना कठिन हो गया है. दास के मुताबिक एक झटके में इसे संभाला नहीं जा सकता है. शक्तिकांत दास (Shakikant Das) के मुताबिक ऐसे झटकों से संभलने में समय लगता है. हालांकि अब कीमतें स्थिर हैं. लेकिन डिमांड-सप्लाई का जो बैलेंस बिगड़ा है उसे पूरी तरह सुधारने में समय लगेगा.

दिसंबर से जारी है बढ़ोतरी का दौर-
यूं तो खाने-पीने की चीजों के दाम में बढ़ोतरी का सिलसिला दिसंबर 2022 से ही जारी है. लेकिन बीते कुछ महीनों में खासकर सब्जियों की कीमतों में बेतहाशा तेजी देखने को मिली है. लिहाजा इसका असर आने वाली एमपीसी की बैठक पर भी देखा जा सकता है.

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